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खटीमा और मसूरी गोलीकांड – उत्तराखंड की आत्मा पर दाग़, आंदोलन की ज्वाला में बलिदान

📅 1 सितम्बर 1994 – खटीमा गोलीकांड
इस दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर गोलियाँ बरसाई गईं।
धरती खून से लाल हो गई 💔 लेकिन पहाड़ का इरादा और मज़बूत हो गया।

खटीमा गोलीकांड के शहीद:
1️⃣ अमर शहीद प्रताप सिंह
2️⃣ अमर शहीद धर्मानंद भट्ट
3️⃣ अमर शहीद भगवान सिंह सिरौला
4️⃣ अमर शहीद गोपीचंद
5️⃣ अमर शहीद रामपाल
6️⃣ अमर शहीद परमजीत सिंह
7️⃣ अमर शहीद सलीम अहमद

2 सितम्बर 1994 -मसूरी गोलीकांड।
खटीमा के अगले ही दिन मसूरी में भी गोलियों ने कई सपनों को छीन लिया।
गोलियों की आवाज़ से पहाड़ कांपा ⚡ लेकिन आंदोलन और प्रचंड हो उठा।

मसूरी गोलीकांड के शहीद:
1️⃣ अमर शहीद बेलमती चौहान
2️⃣ अमर शहीद हंसा धनई
3️⃣ अमर शहीद बलबीर सिंह
4️⃣ अमर शहीद धनपत सिंह
5️⃣ अमर शहीद मदन मोहन ममगई
6️⃣ अमर शहीद राय सिंह बंगारी
7️⃣ अमर शहीद बृजमोहन कोठारी

✊ शहीदों का सपना
इन शहीदों ने प्राण न्योछावर कर हमें राज्य दिलाया,लेकिन क्या आज उनके सपनों का उत्तराखंड बना है❓
👉 क्या पलायन रुका?
👉 क्या गैरसैंण राजधानी बनी?
👉 क्या पहाड़ का पानी और जवानी पहाड़ के काम आई?

🔔 हमारी जिम्मेदारी
शहीदों के नाम केवल दीये जलाने से अमर नहीं होते 🕯️
वे तब अमर होते हैं जब उनके सपनों को हम साकार करते हैं।

🙏 शहीद अमर रहें।
🚩 जय पहाड़ – जय पहाड़ी – जय उत्तराखंड 🚩

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